एक सेवानिवृत्त पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) डिजिटल अरेस्ट घोटाले का शिकार हो गए और अपनी मेहनत की कमाई के 19 लाख रुपये गंवा बैठे। ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताया और PSI (61) से कहा कि जांच के दौरान एक आतंकी संगठन से उनके संबंध सामने आए हैं। इसके बाद उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता छत्रपति संभाजीनगर के निवासी हैं और जून 2023 में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। 4 अगस्त को उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को मुंबई स्थित डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया (DPBI) कार्यालय का अधिकारी बताया। फोन करने वाले ने कहा कि PSI के नाम पर मुंबई में एक सिम कार्ड जारी किया गया है, जिसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया है।
कुछ समय बाद पीड़ित को एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल किया। उसने खुद को NIA के मुंबई कार्यालय का अधिकारी बताया और कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान पीड़ित के एक आतंकी संगठन से संबंध सामने आए हैं। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए पीड़ित को गिरफ्तार करने की धमकी दी। हैरानी की बात यह है कि ठगों ने पीड़ित को यह भी बताया कि उन्हें पता है कि वह सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी हैं।
ठगों ने PSI को डिजिटल अरेस्ट में रखने के लिए फर्जी दस्तावेज भेजे और ‘मामले’ में मदद करने के बहाने दो ऑनलाइन लेनदेन के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 19 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
बाद में पीड़ित ने अपनी आपबीती एक दोस्त को बताई। दोस्त ने उन्हें बताया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।
इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया और मामले में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 (जबरन वसूली) और 318 (धोखाधड़ी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 66D (कंप्यूटर संसाधन का इस्तेमाल कर प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है।
